Sept. 2, 2023

राष्ट्रीय पोषण सप्ताह

National Nutrition Week 

कुपोषण मुक्त भारत के लिए 1 से 7 सितंबर तक राष्ट्रीय पोषण सप्ताह

थीम – 2023 Healthy Diet Going Affordable for All”. 

राष्ट्रीय पोषण सप्ताह के बारे में 

हर साल खाद्य और पोषण बोर्ड देश के सभी चार क्षेत्रों में स्थित अपनी 43 सामुदायिक खाद्य और पोषण विस्तार इकाइयों के माध्यम से राष्ट्रीय पोषण सप्ताह के लिए एक थीम चुनता है।

  • एनीमिया से पीड़ित बच्चों (6-59 महीने) का प्रतिशत 69.4 प्रतिशत से घटकर 58.6 प्रतिशत हो गया है।
  • 8 मार्च 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को कुपोषण मुक्त बनाने की दृष्टि से राजस्थान के झुंझुनू से पोषण अभियान शुरू किया।
  • पोषण अभियान के तहत सरकार ने लक्ष्य निर्धारित किये है.
  • इस योजना के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए इसका संचालन नीति आयोग द्वारा किया जाता है। 
  • 0-6 वर्ष के आयु के बच्चों में ठिगनेपन के 34.6 % को कम कर 25 % करना है।
  • राष्ट्रीय पोषण मिशन के तहत रक्त की कमी एवं पोषण की कमी मे सुधार करने में विशेष योगदान दिया हो।
  • आंगनवाड़ी के कर्मियों को इस योजना के तहत घर-घर जाकर सही जानकारी जुटाना, उसकी सूची बनाना, कुपोषण से अवगत कराना, जैसे कार्यो के लिए उन्हें प्रोत्साहन रूप में 500 रुपए प्रदान किए जाएगे।
  • इस मिशन के अंतर्गत जन्म के समय कम वजन वाले शिशुओं मे प्रति वर्ष कम से कम 2% की कमी लाना। यानि की इसका मुख्य उद्देश्य छोटे बच्चों, महिलाओं और किशोरियों के कुपोषण को कम करना है|

राष्ट्रीय पोषण सप्ताह का इतिहास

भारत में खाद्य और पोषण बोर्ड द्वारा वर्ष 1982 में राष्ट्रीय पोषण सप्ताह की शुरुआत की गई थी। बोर्ड ने सितंबर महीने के पहले सप्ताह में राष्ट्रीय पोषण सप्ताह मनाने का फैसला किया। 

कुपोषण मुक्त भारत के लिए केंद्र सरकार के प्रयास

  • सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0' या मिशन पोषण 2.0 के रूप में फिर से संरेखित किया गया है
  • गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को पोषण सामग्री वितरण किया जाता है 
  • मिशन पोषण 2.0 के तहत देशभर में 13.9 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों के साथ 7074 स्वीकृत परियोजनाएं हैं
  • आज तक 9.94 करोड़ लाभार्थी, अर्थात् गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली माताएं और 6 वर्ष से कम उम्र के बच्चे, आईसीटी एप्लिकेशन, पोषण ट्रैकर पर आंगनवाड़ी सेवाओं के लिए पंजीकृत हैं
  • पोषण 2.0 के तहत खाद्य सुदृढ़ीकरण, ज्ञान की पारंपरिक प्रणालियों का लाभ उठाने और बाजरा के उपयोग को लोकप्रिय बनाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है
  • सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी के कारण उत्पन्न कुपोषण की चुनौती से निपटने के लिए फोर्टिफाइड चावल आवंटित किया जा रहा है
  • कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पोषक अनाज वर्ष 2023 
  • संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय पोषक अनाज वर्ष-2023 :
  • वर्ष 2018 में खाद्य और कृषि संगठन (FAO) द्वारा, वर्ष 2023 को अंतर्राष्ट्रीय पोषक अनाज वर्ष मनाने के भारत के प्रस्ताव को स्वीकार्य करते हुए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2023 को अंतर्राष्ट्रीय पोषक अनाज वर्ष के रूप में घोषित किया। इसका नेतृत्व भारत ने किया तथा 70 से अधिक देशों ने इसका समर्थन किया।
  • खाद्य सुरक्षा और पोषण में पोषक अनाज/बाजरा/मोटे अनाज के योगदान के बारे में जागरूकता का प्रसार करना, टिकाऊ उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार के लिये हितधारकों को प्रेरित करना इसका मुख्य उदेश्य है।

पोषक अनाज/बाजरा/मोटे अनाज:

  • पोषक अनाज में भारत में उपलब्ध कुछ सामान्य फसल इसके उदहारण है- बाजरा रागी (फिंगर मिलेट), ज्वार (सोरघम), समा (छोटा बाजरा), बाजरा (मोती बाजरा) और वरिगा (प्रोसो मिलेट) ।
  • इस तरह के  अनाज का सबसे पहला साक्ष्य सिंधु सभ्यता में पाए गए ये मानव द्वारा उगाए गए पहले फसलों  में से थे।
  • यह लगभग 131 देशों में उगाया जाता है और एशिया एवं अफ्रीका में लगभग 60 करोड़ लोगों का पारंपरिक भोजन है।
  • विश्व में भारत बाजरा का सबसे बड़ा उत्पादक है।
  • यह वैश्विक उत्पादन का 20% और एशिया में उत्पादन का 80% हिस्सा है।
  • दुनिया में भारत, नाइजीरिया और चीन, बाजरा के सबसे बड़े उत्पादक हैं, जो वैश्विक उत्पादन के 55% से अधिक हैं।

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