Aug. 5, 2021

🔥 Historical Terminologies | Asked In UPSC

प्रिय अभ्यर्थियों,  

भारतीय इतिहास में मुख्य शब्दावलियाँ सिविल सर्विसेज प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। संघीय सिविल सेवा परीक्षा एवं राज्य सिविल सेवा परीक्षा इन दोनों में इस प्रकार के प्रश्न बहुत ही आम हैं। परन्तु यह तैयारी का एक ऐसा क्षेत्र है जिसे प्रायःअभ्यर्थी नजरअंदाज करके निकल जाते हैं, किन्तु इन प्रश्नों के महत्व को देखते हुए The Study संस्थान ने इन पारिभाषिक शब्दावलियों को आधार बनाकर प्रश्नों की एक श्रृंखला आरम्भ की है। हमें विश्वास है कि यह श्रृंखला आपकी आगामी प्रारम्भिक परीक्षाओं के लिए उपयोगी सिद्ध होगी।  

 

परामिता/पारमिता

‘परामिता’ शब्द ‘परम्’से व्युत्पन्न है जिसका अर्थ है सबसे उन्नत अवस्था। बौद्ध धर्म की महायान शाखा में परामिता मार्ग पर बल दिया गया है। बौद्ध धर्म में परिपूर्णताओं या कुछ विशेष गुणों की चरम उन्नयन की स्थिति को परामिता कहा गया है। इन गुणों का विकास पवित्रता की प्राप्ति, कर्म को पवित्र करने आदि के लिए किया जाता है, ताकि उपासक बिना किसी बाधा के जीवन जीते हुए ज्ञान की प्राप्ति कर सके।

 

Questions asked in UPSC (Pre.) Examination  

Q.: भारत के सांस्कृतिक इतिहास के संदर्भ में ‘परामिता’ शब्द का सही विवरण निम्नलिखित में से कौन-सा है?        (IAS-2020)

(a) सूत्र पद्धति में लिखे गए प्राचीनतम धर्मशास्त्र पाठ।  

(b) वेदों के प्राधिकार को अस्वीकार करने वाले दार्शनिक सम्प्रदाय।

(c) परिपूर्णताएँ, जिनकी प्राप्ति से बोधिसत्व पथ प्रशस्त हुआ।

(d) आरम्भिक मध्यकालीन दक्षिण भारत की शक्तिशाली व्यापारी श्रेणियाँ

उत्तर – (c)

 

संभावित प्रश्न

Q.:  भारत की धार्मिक प्रथाओं के संदर्भ में ‘पारमिता’पद का संबंध किससे है?

(a) जैन मत (b) बौद्ध मत (c)  आजीवक मत (d) शैव मत

उत्तर – (b)

 

 

कुल्यावाप तथा द्रोणवाप

 

कुल्यावाप एवं द्रोणवाप भूमि माप की पद्धतियाँ थीं। गुप्तकाल में भूमि की माप के लिए आढ़वाप (3/8 से 1/2 एकड़ भूमि), द्रोणवाप (1/2 से 2 एकड़ भूमि) तथा कुल्यावाप (12 से 16 एकड़ भूमि) पद्धतियों का प्रयोग होता था, जो क्रमशः अधक, द्रोण तथा कुल्य मात्रा में अनाज को उपजाने के लिए आवश्यक थीं।

 

Note:- इनके अतिरिक्त, भूमि माप के लिए अंगुल, धनु, दंड, नाल, पाटक, प्रवरतवाप तथा पदावर्त नामक अन्य पद्धतियाँ भी प्रचलन में थीं, जिनमें अंगुल भूमि की सबसे छोटी माप होती थी।

 

Questions asked in UPSC (Pre.) Examination  

Q.:  भारत के इतिहास के संदर्भ में, ‘कुल्यावाप’ तथा ‘द्रोणवाप’ शब्द क्या निर्दिष्ट  करते हैं?                                        (IAS- 2020)

(a) भू-माप   (b) विभिन्न मौद्रिक मूल्यों के सिक्के

(c) नगर की भूमि का वर्गीकरण (d) धार्मिक अनुष्ठान

उत्तर – (a)

 

संभावित प्रश्न

Q.:  गुप्तकाल में भूमि माप के लिए किन-किन पद्धतियों का प्रयोग किया जाता था?

1- आढ़वाप 2-  नाल 3- पदावर्त 4-  शाद्वल  

5- गुनाइगढ़

कूटः

(a) 1, 2, 3 (b) 1, 2, 3, 4 (c) 1, 2, 3, 5 (d) 1, 2, 3, 4,5

 उत्तर – (a)

 

स्थाविरवादी/लोकोत्तरवादी

स्थाविरवादी और लोकोत्तरवादी दोनों बौद्ध धर्म से संबंधित सम्प्रदाय हैं। स्थाविरवाद या थेरवाद संप्रदाय से आशय है- श्रेष्ठ जनों की शिक्षाएँ। इस संप्रदाय के लोग बुद्ध को एक महापुरुष के रूप में मानते हैं। इसका संबंध हीनयान शाखा से है। इसमें ‘अरहत’पर बल दिया गया है जिसका अर्थ है स्वयं के प्रयत्न द्वारा मोक्ष प्राप्त करना।

लोकोत्तरवादी का संबंध बौद्ध धर्म की महासंघिक शाखा से है, जो आगे चलकर महायान संप्रदाय में परिवर्तित हुई। इसमें बुद्ध को एक देवता के रूप में स्वीकार किया गया है। इसके अनुयायी मानते हैं कि मोक्ष की प्राप्ति बोधिसत्व के माध्यम से संभव है। बोधिसत्व निर्वाण प्राप्त कर चुके महापुरूष थे, जो लोगों को मोक्ष प्राप्त करने में सहायता करते थे।

Questions asked in UPSC (Pre.) Examination  

 

Q.  भारत के धार्मिक इतिहास के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए - (IAS- 2020)

1- स्थाविरवादी महायान बौद्ध धर्म से संबद्ध है।

2- लोकोत्तरवादी संप्रदाय बौद्ध धर्म के महासंघिक संप्रदाय की एक शाखा थी।

3- महासंघ के द्वारा बुद्ध के देवत्वारोपण ने महायान बौद्ध धर्म को प्रोत्साहित किया।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1 और 2   (b) केवल 2 और 3

(c) केवल 3   (d) केवल 1 और 3

उत्तर – (b)

 

संभावित प्रश्न

Q.  प्राचीन भारत के धार्मिक इतिहास के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए-

1- महायान बौद्ध धर्म में अरहत की प्राप्ति पर बल दिया गया।

2- उत्सर्पिणी और अवसर्पिणी थेरवाद की दो उपशाखाएँ थीं।

3- बौद्ध भिक्षु द्वारा संघ की स्थायी सदस्यता की अवस्था ‘उपसम्पदा’ कहलाती थी।

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?

(a) 1 और 2  (b) 2 और 3  

(c) केवल 3  (d) केवल 2

उत्तर – (c)

 

 

 

 

हुंडी

भारतीय इतिहास में हुंडी का तात्पर्य एक विनिमय पत्र से होता था जिसका प्रयोग व्यापारी धन के लेन-देन, बाजार से ऋण लेने तथा दूरस्थ क्षेत्रों से व्यापार करने में करते थे। आधुनिक युग में प्रयोग किए जाने वाले चैक, बिल ऑफ़ एक्सचेंज आदि हुण्डी के ही विकसित रूप हैं।

Questions asked in UPSC Exam

Q.:  निम्नलिखित में से कौन-सा उपवाक्य, उत्तर हर्षकालीन स्रोतों में प्रायः उल्लिखित ‘हुंडी’ के स्वरूप की परिभाषा बताता है?     (IAS-2020)

(a) राजा द्वारा अपने अधीनस्थों को दिया गया परामर्श

(b) प्रतिदिन का लेखा-जोखा अंकित करने वाली बही।

(c) विनिमय पत्र

(d) सामन्त द्वारा अधीनस्थों को दिया गया आदेश।

उत्तर – (c)

 

संभावित प्रश्न

Q.:   मध्यकालीन भारतीय इतिहास में निम्नलिखित में से व्यापार एवं विनिमय के लिए किसका प्रयोग प्रचलन में था?

(a) श्रेणी               (b) हुण्डी (c) निष्क (d) उपर्युक्त सभी

उत्तर – (b)

 

 

परिव्राजक/श्रमण/उपासक

परिव्राजक - जब कोई बौद्ध भिक्षु अपने घर का परित्याग कर किसी बौद्ध आचार्य के अधीन भ्रमणशील जीवन व्यतीत करने का निर्णय लेता था, तो उसे परिव्राजक कहते थे तथा इस संस्कार को पबज्जा (प्रव्रज्या) कहा जाता था। इस अवसर पर वह अपने केशों का त्याग कर गेरुए वस्त्र धारण कर लेता था।

श्रमण  - बौद्ध संघ में प्रविष्ट होने वाले व्यक्ति को उपसम्पदा (स्थायी सदस्यता) की स्थिति से पहले ‘श्रमण’ का दर्जा दिया जाता था, फिर 10 वर्षों बाद उसकी योग्यता स्वीकृत होने पर उसे ‘भिक्षु’ का दर्जा मिलता था।

उपासक -  संघ के बाहर गृहस्थ जीवन में रहकर बौद्ध धर्म मानने वाले साधारण अनुयायी उपासक कहलाते थे।

 

Questions asked in UPSC Exam

 

Q.: भारत के सांस्कृतिक इतिहास के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए-  

                                                                                                  (IAS-2020)

1- परिव्राजक - परित्यागी व भ्रमणकारी

2- श्रमण - उच्च पद प्राप्त पुजारी

3- उपासक - बौद्ध धर्म का साधारण अनुगामी

उपर्युक्त में से कौन-से सही सुमेलित हैं?

(a) केवल 1 और 2   (b) केवल 1 और 3  

(c) केवल 2 और 3   (d) 1, 2 और 3

उत्तर – (b)

 

मिरासिदार/औरंग/बेनियान

मिरासिदार - थलकारी या मिरासदार राज्य को भू-राजस्व का भुगतान करते थे और गांव के बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करते थे। ये भूमि के वंशानुगत मालिक थे।

औरंग  - ‘औरंग’ गोदाम (warehouse) के लिए प्रयुक्त एक फ़ारसी शब्द है। यह एक ऐसा स्थान होता है, जहाँ सामान बेचे जाने से पहले एकत्र किया जाता है। ‘औरंग’ शब्द ‘तैयार माल की कार्यशाला’ को भी संदर्भित करता है।

बेनियान -  बेनियान ईस्ट इंडिया कंपनी के प्रबंधकों के व्यक्तिगत भारतीय एजेंट के रूप में कार्य करता था। वह व्यक्तिगत व्यावसायिक गतिविधिायों के प्रबंधन के साथ-साथ दुभाषिए के रूप में भी कार्य करता था।

 

Questions asked in UPSC Exam

Q.: भारत के इतिहास के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए-  (IAS-2020)

1- औरंग  - राजकोष का प्रभारी

2- बेनियान  - ईस्ट इंडिया कंपनी का भारतीय एजेंट

3- मिरासिदार  - राज्य का नामित राजस्व दाता

उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं?

(a) केवल 1 और 2   (b) केवल 2 और 3  

(c) केवल 3   (d) 1, 2 और 3

उत्तर – (b)

 

विष्टि

गुप्तकाल में विष्टि का तात्पर्य बेगार या बलात् श्रम से था जो राज्य के लिए आय का स्रोतों था। यह सामान्य जनता से लिया जाने वाला एक प्रकार का कर था। इससे किसानों के शोषण में वृद्धि हुई। विष्टि पद्धति का पहला पुरातात्विक साक्ष्य रूद्रदामन के जूनागढ़ अभिलेख से प्राप्त होता है।

 

Questions asked in UPSC Exam

 

Q.: गुप्तकाल के दौरान भारत में बलात् श्रम (विष्टि) के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?      (IAS-2019)

(a) इसे राज्य के लिए आय का एक स्रोतों, जनता द्वारा दिया जाने वाला एक प्रकार का कर, माना जाता था।

(b) यह गुप्त साम्राज्य के मध्य प्रदेश तथा काठियावाड़ क्षेत्रों में पूर्णतः विद्यमान था।

(c) बलात् श्रमिक साप्ताहिक मजदूरी का हकदार होता था।

(d) मजदूर के ज्येष्ठ पुत्र को बलात् श्रमिक के रूप में भेज दिया जाता था।

उत्तर – (a)

 

संभावित प्रश्न

Q.: निम्नलिखित में से कौन-कौन गुप्तकाल के राजस्व स्रोतों में शामिल थे?

1- बलि 2- उद्रंग 3- विष्टि 4- हिरण्य  

5- वात-भूत

कूटः

(a) 1, 2, 3 (b) 3, 4, 5 (c) 3, 4 (d) 1, 2, 3, 4, 5

उत्तर – (d)

 

 

आमिल

सल्तनत काल में ‘आमिल’ या ‘अमलगुजार’ शब्द का प्रयोग ग्राम में भूमि कर की वसूली करने वाले अधिकारी के लिए किया जाता था। मुगल काल में जिले के प्रमुख राजस्व अधिकारी के रूप में आमिल खालिसा भूमि से लगान एकत्रित करता था तथा आय-व्यय की वार्षिक रिपोर्ट केन्द्र को भेजता था। इसके अतिरिक्त कोतवाल की अनुपस्थिति में यह न्यायिक कार्य भी करता था। ‘वितिकची’, आमिल के सहयोगी के रूप में कार्य करता था।

 

Questions asked in UPSC Exam

 

Q.: निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए-    (IAS-2019)

1- दिल्ली सल्तनत के लिए राजस्व प्रशासन में राजस्व वसूली के प्रभारी को ‘आमिल’ कहा जाता था।

2- दिल्ली सुल्तानों की इक्ता प्रणाली एक प्राचीन देशी संस्था थी।

3- ‘मीर-बख्शी’ का पद दिल्ली के खिलजी सुल्तानों के शासनकाल में अस्तित्व में आया।

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

(a) केवल 1   (b) केवल 1 और 2  

(c) केवल 3   (d) 1, 2 और 3

उत्तर – (a)

 

 

 

जागीरदार/जमींदार

 

जागीरदार -  मुगल काल में मनसबदारों को ‘नकद’ एवं ‘जागीर’ दोनों रूपों में वेतन दिया जाता था। जब मनसबदारों को वेतन के रूप में जागीर दी जाती थी, तो वे जागीरदार कहलाते थे। ये वंशानुगत नहीं होते थे, बल्कि अपने प्रशासनिक कार्यों के बदले में भूमि आवंटन के अधिकार प्राप्त करते थे।

जमींदार - जमींदार अपनी भूमि के स्वामी होते थे। ये अपने प्रभाव क्षेत्र से भू-राजस्व का संग्रह कर राज्य को देते थे तथा बदले में वित्तीय मुआवजा प्राप्त करते थे। इनके राजस्व अधिकार वंशानुगत होते थे। इनका मुख्य कार्य राजस्व की वसूली था, किंतु इसके अतिरिक्त वे आवश्यकता पड़ने पर कुछ विशेष सेवाएँ व संसाधन राज्य को उपलब्ध कराते थे।

 

Questions asked in UPSC Exam

 

Q.: मुगल भारत में संदर्भ में, जागीरदार और जमींदार के बीच क्या अंतर है/हैं?  (IAS-2019)

1- जागीरदारों के पास न्यायिक और पुलिस दायित्वों के एवज में भूमि आवंटनों का अधिकार होता था, जबकि जमींदारों के पास राजस्व अधिकार होते थे तथा उन पर राजस्व उगाही को छोड़कर अन्य कोई दायित्व पूरा करने की बाध्यता नहीं होती थी।

2- जागीरदारों को किए गए भूमि आवंटन वंशानुगत होते थे और जमींदारों के राजस्व अधिकार वंशानुगत नहीं होते थे।

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए-

(a) केवल 1 (b) केवल 2 (c) 1 और 2 दोनों (d) न तो 1, न ही 2

उत्तर – (d)

 

 

 

स्थानकवासी

 

स्थानकवासी संप्रदाय का संबंध जैन धर्म से है। यह जैन धर्म की श्वेताम्बर शाखा का एक उपसंप्रदाय है। इसकी स्थापना 1653 ई. में ‘लवजी’ नामक व्यापारी ने की थी। इस मत के अनुसार ईश्वर निराकार है। इसलिए ये मूर्तिपूजा में विश्वास नहीं करते। जैन धर्म का श्वेताम्बर संप्रदाय उदारवृत्ति वाला था तथा धार्मिक नियमों में परिस्थिति के अनुसार परिवर्तन का पक्षधर था।

 

Questions asked in UPSC Exam

Q.: भारत की धार्मिक प्रथाओं के संदर्भ में ‘स्थानकवासी’ सम्प्रदाय का संबंध किससे है?  

                                                                                                         (IAS-2018)

(a) बौद्ध मत   (b) जैन मत  

(c) वैष्णव मत   (d) शैव मत

उत्तर – (b)

 

संभावित प्रश्न

Q.: स्थानकवासी संप्रदाय का संबंध है-

(a) स्थविरवादी शाखा से  (b) महायान शाखा से

(c) श्वेताम्बर शाखा से   (d) दिगम्बर शाखा से

उत्तर – (c)

 

सौत्रान्तिक/सम्मितीय/सर्वास्तिवादी

सौत्रान्तिक बौद्ध धर्म की हीनयान शाखा का प्रमुख संप्रदाय है। इसके अतिरिक्त वैभाषिक भी इसी शाखा का अन्य प्रमुख संप्रदाय है। सर्वास्तिवादी, सम्मितीय और स्थविरवादी हीनयान के अन्य उपसंप्रदाय हैं। बौद्ध धर्म के अंतर्गत सर्वास्तिवादी में प्रयुक्त सर्व का तात्पर्य तीनों कालों अर्थात् भूत, वर्तमान और भविष्य से है। इनकी मान्यता थी कि फि़नोमिना के अवयव पूर्णतः क्षणिक नहीं हैं, अपितु अव्यक्त रूप में सदैव अस्तित्ववान रहते हैं।

इसके अतिरिक्त, महायान बौद्ध संप्रदाय के दो मुख्य उपसंप्रदाय हैं - शून्यवाद या माध्यमिका एवं विज्ञानवाद या योगाचार।

 

Questions asked in UPSC Exam

Q.: भारत के धार्मिक इतिहास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए-  (IAS-2018)

1- सौत्रान्तिक और सम्मितीय जैन मत के संप्रदाय थे।

2- सर्वास्तिवादियों की मान्यता थी कि दृग्विषय (फि़नोमिना) अवयव पूर्णतः क्षणिक नहीं हैं, अपितु अव्यक्त रूप में  विद्यमान रहते हैं।  

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1 (b) केवल 2 (c) 1 और 2 दोनों (d) न तो 1, न ही 2

उत्तर – (b)

 

 

 

एरिपत्ति/तनयूर/घटिका

 

एरिपत्तिः- एरिपत्ति भूमि मुख्यतः जलाशय भूमि थी, जिससे प्राप्त राजस्व को पृथक रूप से ग्राम जलाशय के प्रबंधन हेतु निर्धारित कर दिया जाता था।

तनियूर:-  तनियूर, चोल साम्राज्य (850-1200 ई.) के प्रशासन से संबंधित शब्द है। इसके तहत सभी ग्राम एक स्वशासित इकाई के समान थे। प्रत्येक ग्राम मिलकर एक नाडु (स्थानीय क्षेत्र) का निर्माण करते थे। नाडु के अंतर्गत अनेक ग्राम संघ ‘कुर्रम’ कहलाते थे। तनियूर या तंकुर्रम बड़े नगरों में गठित कुर्रम थे। कहीं-कहीं बड़े गाँव के लिए भी तनियूर का ही प्रयोग किया गया है।

घटिका:-  पल्लव राज्य के अंतर्गत ‘घटिका’ शब्द का प्रयोग कर्नाटक के मंदिरों के निकट स्थित संस्कृत महाविद्यालयों (शैक्षणिक संस्थान) के लिए किया जाता था।

Questions asked in UPSC Exam

Q.: भारत के इतिहास के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए-  (IAS-2016)

 शब्द   विवरण

1- एरिपत्ति - भूमि, जिससे मिलने वाला राजस्व अलग से ग्राम जलाशय के रख-रखाव के लिए निर्धारित कर दिया जाता था।

2- तनियूर - एक अकेले ब्राह्मण अथवा एक ब्राह्मण समूह को दान में दिए गए ग्राम

3- घटिका - प्रायः मंदिरों के साथ संबद्ध महाविद्यालय

उपर्युक्त में से कौन-सा/से युग्म सही सुमेलित है/हैं?

(a) 1 और 2 (b) केवल 3 (c) 2 और 3 (d) 1 और 3

 

उत्तर – (d)

 

 

अरघट्टा

मध्यकालीन भारत में ‘अरघट्टा (वाटर-व्हील)’ कृषि भूमि की सिंचाई का एक प्रकार था। तुर्कों के आगमन के पश्चात् नई प्रौद्योगिकियों के विकास क्रम में कागज, चरखा, लोहे की रकाब आदि अन्य उपकरणों का प्रचलन शुरू हुआ। साथ ही सिंचाई व्यवस्था में भी सुधार हुआ। नोरिया, रहट (अरघट्टा), चरस, साकिया एवं दौलाब सिंचाई के प्रचलित साधन थे। नोरिया केवल खुले तल (नदी, तालाब) पर काम कर सकता था, जबकि रहट गहरे कुओं से भी पानी निकाल सकता था। गियर युक्त रहट (पर्शियन व्हील) का प्रथम वर्णन बाबर ने किया है।

 

Questions asked in UPSC Exam

Q.: मध्यकालीन भारत के आर्थिक इतिहास के संदर्भ में शब्द ‘अरघट्टा (Arghatta) किसे निरूपित करता है?       (IAS-2016)

(a) बंधुआ मजदूर  

(b) सैन्य अधिकारियों को दिए गए भूमि अनुदान

(c) भूमि की सिंचाई के लिए प्रयुक्त जल चक्र (वाटर-व्हील)

(d) कृषि भूमि में बदली गई बंजर भूमि।

उत्तर – (c)

 

 

मागध/अग्रहारिक

मागध -  प्राचीन भारत में मागध एक दरबारी था। वस्तुतः प्राचीन भारत से संबंधित इतिवृत्तों, राजवंशीय इतिहासों या महाकाव्य संबंधी कथाओं को याद करना विभिन्न समूहों का कार्य था, जिन्हें सूत या मागध कहते थे।

अग्रहारिक - 5वीं-6वीं शताब्दी में ब्राह्मणों को राजकीय भूमि अनुदान के रूप में दिए जाने वाले गाँवों को अग्रहार, ब्रह्मदेय या शासन कहा जाता था तथा ऐसे ब्राह्मणों को ‘अग्रहारिक’ कहते थे। ये अग्रहार ग्राम राजस्व मुक्त होते थे तथा इन्हें कुछ विशेषाधिाकार भी प्राप्त थे।

 

Questions asked in UPSC Exam

Q.: भारत के सांस्कृतिक इतिहास के संदर्भ में इतिवृत्तों, राजवंशीय इतिहासों तथा वीरगाथाओं को कंठस्थ करना निम्नलिखित में से किसका व्यवसाय था?   (IAS-2016)

(a) श्रमण           (b) परिव्राजक  

(c) अग्रहारिक   (d) मागध

उत्तर – (d)

 

बंजारे

भारतीय इतिहास के मध्यकाल में बंजारे नमक के व्यापारी वर्ग से संबंधित थे। इन्हें लंबाणी, वंजारा और गोरमाटी भी कहा जाता था। वस्तुतः बंजारा एक ऐसा समुदाय है, जिसे सामान्यतः घुमंतू समुदाय के रूप में जाना जाता है। यह मुख्य रूप से भारत के राजस्थान में पाए जाते हैं। बंजारा शब्द संस्कृत के ‘वनचर’ शब्द से व्युत्पन्न है, जिसका अर्थ है वनों में विचरण करने वाला। लंबाणी या लामनी संस्कृत शब्द ‘लवण’ से लिया गया प्रतीत होता है, जो इस समुदाय की प्रमुख व्यापार की वस्तु थी।

 

Questions asked in UPSC Exam

Q.- भारतीय इतिहास के मध्यकाल में बंजारे सामान्यतः कौन थे?  (IAS-2016)

(a) कृषक (b) योद्धा

(c) बुनकर (d) व्यापारी

उत्तर – (d)

 

महत्तर/पट्टकिल

पूर्व मध्यकाल या मध्यकालीन भारत में प्रशासन की सबसे छोटी इकाई ‘ग्राम’ थी। इसका प्रमुख महत्तर कहलाता था। दक्षिण भारत में इसे पट्टकिल कहा जाता था।

वस्तुतः बुधगुप्त के शासनकाल में निर्गत दामोदर ताम्रपत्र अभिलेख में अष्टकुल-अधिकरण (आठ सदस्यों वाला बोर्ड) की चर्चा हुई है। इस परिषद् की अध्यक्षता ‘महत्तर’ करता था। हालांकि, ग्राम वृद्ध, ग्रामिक अथवा परिवार के मुखिया भी महत्तर कहे जाते थे।

 

Questions asked in UPSC Exam

Q.- मध्यकालीन भारत में ‘महत्तर’ व ‘पट्टकिल’ पदनाम किनके लिए प्रयुक्त होते थे?  

                                                                                                      (IAS-2014)

(a) सैन्य अधिाकरी          (b) ग्राम मुखिया

(c) कर्मकाण्ड के विशेषज्ञ  (d) शिल्पी श्रेणियों के प्रमुख

उत्तर – (b)